समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने पैनकार्ड और पासपोर्ट मामले में सजा बढ़ाने की अपील पर सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया है कि इस मामले में शिकायतकर्ता नवाब काजिम अली को भी सुना जाए।
जानें पूरी बात ?
दरअसल, राज्य सरकार ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को बढ़ाने के लिए अपील दाखिल की है। इसी अपील में शिकायतकर्ता नवाब काजिम अली ने भी पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद नवाब काजिम अली ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान आजम खान और अब्दुल्ला आजम के वकीलों ने नवाब काजिम अली की याचिका पर सवाल उठाते हुए उसे खारिज करने की मांग की। उन्होंने दलील दी कि शिकायतकर्ता को इस अपील में पक्षकार बनाए जाने का कोई औचित्य नहीं है। लेकिन हाईकोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और ट्रायल कोर्ट के फैसले को पलटते हुए स्पष्ट किया कि शिकायतकर्ता को भी अपना पक्ष रखने का अधिकार है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि सजा बढ़ाने की अपील जैसे मामलों में शिकायतकर्ता की बात भी सुनी जानी चाहिए, क्योंकि वह मामले का महत्वपूर्ण पक्ष होता है। अदालत ने ट्रायल कोर्ट को निर्देश दिया कि वह नवाब काजिम अली को सुनवाई का अवसर दे और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई करे।
2018 में नवाब काजिम अली ने शिकायत दर्ज
गौरतलब है कि यह पूरा मामला अब्दुल्ला आजम के पैनकार्ड और पासपोर्ट में अलग-अलग जन्मतिथि दर्ज होने से जुड़ा है। इस संबंध में साल 2018 में नवाब काजिम अली ने शिकायत दर्ज कराई थी। बाद में साल 2019 में आकाश सक्सेना की तहरीर पर इसी आधार पर एफआईआर दर्ज हुई थी। रामपुर की ट्रायल कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को इस मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम समेत अन्य आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की सजा सुनाई थी। अब हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद सजा बढ़ाने की अपील पर सुनवाई में नया मोड़ आ गया है।
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